भगवा ध्वज प्राचीन भारत,शाश्वत सनातन हिन्दू संस्कृति एवं धर्म का प्रतीक है

bhagwa1 motivation research paper jrotc history essay science physics coursework important inventions essay go to link printable coupon viagra a thesis paper sample http://fall.law.fsu.edu/stay.php?home=how-do-i-delete-voicemail-messages-from-my-iphone-6 https://www.upaya.org/teaching/help-with-my-essay/21/ https://www.go-gba.org/133-how-do-i-write-an-outline-for-an-essay/ http://teacherswithoutborders.org/teach/write-my-essaysv/21/ https://soils.wisc.edu/wp-content/uploads/index.php?apr=financial-analysis-assignment boston university essay help top dissertation proposal ghostwriters websites us 1st essay free refill on cialis go cialis daily use alcohol enter thesis project outline help with statistics letter follow site levitra v viagra thesis zno thin films viagra nascar jacket http://jeromechamber.com/event/essays-on-us-foreign-policy/23/ top essays ghostwriting site usa top thesis proposal ghostwriter for hire usa https://www.sojournercenter.org/finals/what-is-globalization-essay/85/ cambridge essay competitions https://bigsurlandtrust.org/care/cialis-rezeptfrei-biz-shop-index/20/ follow सनातन हिन्दू मान्यता हे कि चेत्र शुक्ल प्रतिपदा पर सृष्टि का प्रारंभ हुआ था अतः सभी भारतीयों द्वारा इस दिन शुभ नवसंवतसर का प्रारंभ माना जाकर, नववर्ष पर भगवा ध्वज का पूजन कर घट स्थापना कर माँ शक्ति की उपासना का 9 दिवसीय शुभ नवरात्र महापर्व मनाया जाता हे .
भगवा ध्वज प्राचीन भारत,शाश्वत सनातन हिन्दू संस्कृति एवं धर्म का प्रतीक है,यह हिन्दू धर्म के प्रत्येक पवित्र स्थान मन्दिर, मठ, आश्रम,पर फहराया जाता है। यह हिन्दुओं के महान प्रतीकों में से प्रमुख है। इसका रंग भगवा (saffron) केसरिया होता है। यह त्याग, बलिदान, ज्ञान, शुद्धता एवं सेवा का प्रतीक है। यह हिंदुस्थानी संस्कृति का शास्वत सर्वमान्य प्रतीक है। हजारों हजारों सालों से भारत के शूरवीरों ने इसी भगवा ध्वज की छाया में लड़कर देश की रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर किये।
भगवा ध्वज दो त्रिकोणों से मिलकर बना है जिसमें से उपर वाला त्रिकोण नीचे वाले त्रिकोण से छोटा होता है। ध्वज का भगवा रंग उगते हुए सूर्य का रंग है; आग का रंग है। उगते सूर्य का रंग और उसे ज्ञान, वीरता का प्रतीक माना गया और इसीलिए हमारे पूर्वजों ने इसे इसे प्रेरणा स्वरूप माना।
भगवा ध्वज हिन्दू संस्कृति और धर्म का शाश्वत प्रतीक है। यह धर्म, समृद्धि, विकास, अस्मिता, ज्ञान और विशिष्टता का प्रतीक है। इन अनेक गुणों या वस्तुओं का सम्मिलित द्योतक है अपना यह भगवा ध्वज।
भगवा ध्वज का रंग केसरिया है। यह उगते हुए सूर्य का रंग है। इसका रंग अधर्म के अंधकार को दूर करके धर्म का प्रकाश फैलाने का संदेश देता है। यह हमें आलस्य और निद्रा को त्यागकर उठ खड़े होने और अपने कर्तव्य में लग जाने की भी प्रेरणा देता है। यह हमें यह भी सिखाता है कि जिस प्रकार सूर्य स्वयं दिनभर जलकर सबको प्रकाश देता है, इसी प्रकार हम भी निस्वार्थ भाव से सभी प्राणियों की नित्य और अखंड सेवा करें।
यह भगवा (saffron) केसरिया रंग यज्ञ की ज्वाला का भी रंग है। यज्ञ सभी कर्मों में श्रेष्ठतम कर्म बताया गया है। यह आन्तरिक और बाह्य पवित्रता, त्याग, वीरता, बलिदान और समस्त मानवीय मूल्यों का प्रतीक है। यह केसरिया रंग हमें यह भी याद दिलाता है कि केसर की तरह ही हम इस संसार को महकायें।
भगवा ध्वज में दो त्रिभुज हैं, जो यज्ञ की ज्वालाओं के प्रतीक हैं। ऊपर वाला त्रिभुज नीचे वाले त्रिभुज से कुछ छोटा है। ये त्रिभुज संसार में विविधता, सहिष्णुता, भिन्नता, असमानता और सांमजस्य के प्रतीक हैं।
ये हमें सिखाते हैं कि संसार में शान्ति बनाये रखने के लिए एक दूसरे के प्रति सांमजस्य, सहअस्तित्व, सहकार, सद्भाव और सहयोग भावना होना आवश्यक है, जो कि हिन्दू धर्म के आधार हैं.
भगवा ध्वज दीर्घकाल से हमारे इतिहास का मूक साक्षी रहा है। इसमें हमारे पूर्वजों, ऋषियों और माताओं के तप की कहानियां छिपी हुई हैं। यही हमारा सबसे बड़ा गुरु, मार्गदर्शक और प्रेरक है।
मौलिक भगवा ध्वज में कुछ भी लिखा नहीं जाता।मंदिरों पर लगाये जाने वाले ध्वजों में ओउम् आदि लिखा जा सकता है।इसी प्रकार संगठन या व्यक्ति विशेष के ध्वज में अन्य चिह्न हो सकते हैं,लेकिन किसी भी स्थिति में उनका रंग भगवा ही होना चाहिए।
सप्त सिन्धु सिन्धु पर्यन्तः प्राचीन बृहद भारत वर्ष का यही राष्ट्र ध्वज और चक्रवर्ती सेनाओं का भी यही ध्वज था. महान विक्रमादित्य , शिवाजी की सेना का यही ध्वज था; श्रीराम, कृष्ण और अर्जुन के रथों का यही ध्वज है, अर्जुन के ध्वज में हनुमान का चिह्न था।।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी किसी व्यक्ति विशेष को अपना गुरु नहीं माना है, बल्कि अपने परम पवित्र भगवा ध्वज को ही गुरु के रूप में स्वीकार और अंगीकार किया है। साल में एक बार सभी स्वयंसेवक अपने गुरु भगवा ध्वज के सामने ही अपनी गुरु दक्षिणा समर्पित करते हैं.संघ की शाखाओं में इसी ध्वज को लगाया जाता है, इसका ही वन्दन होता है और इसी ध्वज को साक्षी मानकर सारे कार्य किये जाते हैं।
देशवासियों स्वतंत्रता सेनानियों ने भी इसी भगवा ध्वज को स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रीय ध्वज स्वीकार करने का आग्रह किया था।