सायबर सुरक्षा, रफ़्तार और पहुँच से जुड़ा इन्टरनेट इंफ़्रास्ट्रक्चर तैयार करे बिना कैशलेस या डिजीटल व्यवहार यथार्त में परिणित होना दुष्कर

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ऐसे लोग इंटरनेट के बिना भी डिजिटल बैंकिंग तक पहुंच सकते हैं, कहा जा रहा है कि कोई भी आम आदमी कैशलैस डिजिटल ट्रांसेक्शन के लिए क्यू आर कोड , यूएसडीडी (Unstructured Supplementary Service Data) आदि प्रणाली अपना सकता सकते हैं. इन्हें क्विक कोड या फ़ीचर कोड भी कहा जाता है. इसमें आप फ़ोन पर हैश, स्टार और नंबर डायल कर बैंक की सुविधाओं का फ़ायदा ले सकते हैं और इसमें मैसेजिंग के ज़रिेए संचार करता है. यह बिना इंटरनेट के वैप ब्राउज़िंग, प्री-पेड कॉलबैक, मोबाइल-मनी सर्विस इस्तेमाल कर सकते हैं.

लेकिन ये भी समस्या का पूरा हल नहीं कर पाता है ,देश के इंटरनेट व्यवस्था की तुलना दूसरे देशों से करे
कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क सर्विस प्रोवाइडर अकामाई की ‘स्टेट ऑफ़ द इंटरनेट – कनेक्टिविटी’ रिपोर्ट ने भारत की इंटरनेट की स्पीड स्पस्ट की है, रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक़, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत और फिलिपींस ऐसे देश हैं जो 4MBPS के अनिवार्य न्यूनतम बेसिक स्टैंडर्ड तक भी नहीं पहुँच पाए हैं. दोनों देश 3.5 MBPS ब्रॉडबैंड की औसत स्पीड के साथ फ़ेहरिस्त में सबसे नीचे 114वें पायदान पर हैं.

‘स्टेट ऑफ़ द इंटरनेट – कनेक्टिविटी’ रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में सबसे बेहतरीन इंटरनेट स्पीड 27 mbps वाला देश दक्षिण कोरिया हे, और इंटरनेट की पीक स्पीड की बात करें तो बाज़ी मारी है सिंगापुर ने, जहां आपको किसी ख़ास समय में इंटरनेट 146.9 MBPS की रफ़्तार से भागता मिल सकता है. दक्षिण कोरिया पीक स्पीड के मामले में चौथे नंबर पर है, जहां ये स्पीड 103.6 MBPS है.
इंटरनेट की पीक स्पीड में भारत 25.5 MBPS के साथ एक बार फिर सूची में बिल्कुल सबसे नीचे नज़र आता है. इस फ़ेहरिस्त में वो 104 वें पायदान पर है, जबकि फिलिपींस 29.9 MBPS के साथ उससे कहीं ऊपर 88वें स्थान पर है.
दुनिया में सबसे तेज़ औसत मोबाइल कनेक्शन स्पीड ब्रिटेन में मिलेगी जो 27 MBPS है जबकि भारत में में औसत मोबाइल कनेक्शन स्पीड 3.2 MBPS हे।

सायबर सुरक्षा, रफ़्तार और पहुँच से जुड़ा इन्टरनेट इंफ़्रास्ट्रक्चर तैयार करे बिना कैशलेस या डिजीटल व्यवहार यथार्त में परिणित होना दुष्कर हे । इन्टरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के पश्चात् भी गरीब ग्रामीण, अनपढ़ बुज़ुर्ग,  पिछड़ी जनता को मोबाइल टेक्नॉलॉजी का इस्तेमाल करने के लिए शिक्षित कर सक्षम बनाना, और बड़ी चुनोती है.