पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य रचित युगनिर्माण सत्संकल्प में सम्पूर्ण सनातन उदेश्यो मूल्यों आदर्शो का, सरल सहज आचरण पद्धति के, स्वरुप में समावेश हे

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अखंड ज्योति पत्रिका 1940 से 2011 तक चार भाषाओ में निकाली, युगनिर्माण योजना और विचार क्रांति अभियान का सूत्रपात कर गायत्री परिवार की रचना की, गायत्री तीर्थ शांतिकुंज , ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान, देव संस्कृति विश्विद्यालय, जनजागरण प्रेस व् गायत्री तपोभूमि मथुरा, 2400 शक्तिपीठ और 24000 गायत्री चेतना व प्रज्ञा केंद्रों, लाखो स्वाध्याय मंडलो की स्थापना की जिनसे करोडो अनुयायी परिजन धर्मतंत्र से लोकशिक्षण , मनुष्य में देवत्व के उदय से पृथ्वी पर स्वर्ग का अवतरण , मिशन से सतत जुड़े हुए हे,
गायत्री परिवार जीवन जीने कि कला के, संस्कृति के आदर्श सिद्धांतों के आधार पर परिवार,समाज,राष्ट्र युग निर्माण करने वाले व्यक्तियों का पारिवारिक संघ है,
वसुधैवकुटुम्बकम् की मान्यता के आदर्श का अनुकरण करते हुये हमारी प्राचीन ऋषि परम्परा का विस्तार करने वाला समूह है,
परमपूज्य गुरुदेव के विचारों संदेशो की, साहित्य की, गायत्री परिजनों की, मिशन की पहुँच प्रत्येक भारतीय परिवार तक हे !
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पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य रचित युगनिर्माण सत्संकल्प में सम्पूर्ण सनातन उदेश्यो आदर्शो मूल्यों का, सरल सहज आचरण पद्धति के, स्वरुप में समावेश हे


इसे व्यक्तिगत एवं सामूहिक स्तर पर नियम से धीरे- धीरे, समझकर एवं श्रद्घापूर्वक अंतःकरण से पढ़ें, चिंतन मनन कर, धारण करे
1. हम ईश्वर को सर्वव्यापी, न्यायकारी मानकर उसके अनुशासन को अपने जीवन में उतारेंगे ।।
2. शरीर को भगवान का मन्दिर समझकर आत्म- संयम और नियमितता द्वारा आरोग्य की रक्षा करेंगे ।।
3. मन को कुविचारों और दुर्भावनाओं से बचाये रखने के लिए स्वाध्याय एवं सत्संग की व्यवस्था रखे रहेंगे ।।
4. इंद्रिय- संयम, अर्थ- संयम, समय- संयम और विचार- संयम का सतत् अभ्यास करेंगे ।।
5. अपने आपको समाज का एक अभिन्न अंग मानेंगे और सबके हित में अपना हित समझेंगे ।।
6. मर्यादाओं को पालेंगे, वर्जनाओं से बचेंगे, नागरिक कर्तव्यों का पालन करेंगे और समाजनिष्ठ बने रहेंगे।
7. समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी को जीवन का एक अविच्छिन्न अंग मानेंगे ।।
8. चारों ओर मधुरता, स्वच्छता, सादगी एवं सज्जनता का वातावरण उत्पन्न करेंगे ।।
9. अनीति से प्राप्त सफलता की अपेक्षा नीति पर चलते हुए असफलता को शिरोधार्य करेंगे।
10. मनुष्य के मूल्यांकन की कसौटी उसकी सफलताओं, योग्यताओं एवं विभूतियों को नहीं, उसके सद्विचारों और सत्कर्मों को मानेंगे ।।
11. दूसरों के साथ वह व्यवहार न करेंगे, जो हमें अपने लिए पसंद नहीं ।।
12. नर- नारी परस्पर पवित्र दृष्टि रखेंगे ।।
13. संसार में सत्प्रवृत्तियों के पुण्य प्रसार के लिए अपने समय, प्रभाव, ज्ञान, पुरुषार्थ एवं धन का एक अंश नियमित रूप से लगाते रहेंगे ।।
14. परम्पराओं की तुलना में विवेक को महत्त्व देंगे ।।
15. सज्जनों को संगठित करने, अनीति से लोहा लेने और नवसृजन की गतिविधियों में पूरी रुचि लेंगे ।।
16. राष्ट्रीय एकता एवं समता के प्रति निष्ठावान रहेंगे ।। जाति, लिंग, भाषा, प्रान्त, सम्प्रदाय आदि के कारण परस्पर कोई भेदभाव न बरतेंगे ।।
17. मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता आप है, इस विश्वास के आधार पर हमारी मान्यता है कि हम उत्कृष्ट बनेंगे और दूसरों को श्रेष्ठ बनायेंगे, तो युग अवश्य बदलेगा ।।
18. हम बदलेंगे- युग बदलेगा, हम सुधरेंगे- युग सुधरेगा इस तथ्य पर हमारा परिपूर्ण विश्वास है।
धर्म की जय हो
अधर्म का नाश हो
प्राणियो में सद्भावना हो
विश्व् का कल्याण हो
विशेष आग्रह, कृपया उपरोक्त को , स्वयं प्रति पल क्षण दिन, जब भी अवसर मिले मनन करे, देखेंगे की, परिवर्तन की प्रक्रिया प्रारंभ हो , अद्भुत् परिणाम प्राप्त होते हे,
समय समय पर यह भी आत्म निरिक्षण कर देख सकते हे, कि इनमे से किस सदाचरण संकल्प की, कितनी पूर्ती जीवन में धारण कर पाए, और लोगो को प्रेरित करा पाए
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