जय माँ श्री गढ़कालिका देवी सदा प्रसन्न रहे ॐ एं ह्रीम श्रीम् क्लिं चामुण्डायै विच्च्ये !!

ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्चजगत्यांजग्त् , तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृध: कस्यस्विद्धनम्।।
“इस चराचर जगत् में जो कुछ भी विधमान है जड़ चैतन्य वह सब ईश्वर द्वारा आच्छदित है, ईश्वर का ही है, अतः लालच न् करो, त्यागपूर्वक उपभोग करो
जय श्री महाकाल
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