ॐ शांति शांति शांति सर्वत्र चहुँ और शांति की प्रार्थना

ॐ ! विश्वानि देव  सवितर्दुरितानि परा  सुव ! यद् भद्रंतन्न आ  सुव* !!
ॐ ! हे सकल जगत के उत्पत्तिकर्ता ,  समस्त  ऐश्वर्यो  व  सुखो  के  दाता  सर्वशक्तिमान  सूर्य देव ! आप कृपा करके हमारे समस्त दुर्गुण , दुर्व्यसन , दुर्दिनों  एवम  दुःखो  को दूर  कर दीजिये , और  जो कुछ अच्छा  और  कल्याणकारी  है  वह  हमें प्राप्त  कराइए !
Om. vishvani deva savitar-durtani parasuva. Yad bhadram tanna asuva.
Om. O God, the creator of the universe and the Giver of all hapiness.
Keep us far from bad habits, bad deeds, and calamities.
May we attain everything that is auspicious

ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति:,
पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति: वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:,
सर्वँ शान्ति:, शान्तिरेव
शान्ति: सा मा शान्तिरेधि॥
ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥
यजुर्वेद के इस शांति पाठ मंत्र के जरिये साधक ईश्वर से शांति बनाये रखने की प्रार्थना करता है। विशेषकर सनातन हिंदू संप्रदाय के लोग अपने किसी भी प्रकार के धार्मिक कृत्य, संस्कार, यज्ञ आदि के आरंभ और अंत में इस शांति पाठ के मंत्रों का मंत्रोच्चारण करते हैं। इस मंत्र के जरिये कुल मिलाकर जगत के समस्त जीवों, वनस्पतियों और प्रकृति में शांति बनी रहे इसकी प्रार्थना की गई है।
इसका शाब्दिक अर्थ लें तो उसके अनुसार इसमें यह गया है कि हे परमात्मा स्वरुप शांति कीजिये,
वायु में शांति हो,
अंतरिक्ष में शांति हो,
पृथ्वी पर शांति हों,
जल में शांति हो,
औषध में शांति हो,
वनस्पतियों में शांति हो,
विश्व में शांति हो, सभी देवतागणों में शांति हो,
ब्रह्म में शांति हो,
सब में शांति हो, चारों और शांति हो, हे परमपिता परमेश्वर शांति हो, शांति हो, शांति हो।
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